गोरखपुर नामक एक गांव था। उस गांव में कुआं ना होने की वजह से गांव के लोगों को पानी लाने के लिए नदी जाना पड़ता था। 1 दिन सोनाली नाम की एक औरत नदी के किनारे कपड़े धो रही थी। उसी वक्त नदी से डरावनी वाली आवाज सुनाई पड़ी सोनाली डर के मारे चिल्लाई और बोली कौन है तभी नदी से एक भूत प्रकट हुई और भूत हंसने लगा डर के मारे सोनाली दौड़ते हुए गांव चल गई।


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गांव जाकर गांव वालों से कहा कि नदी में भूत है गांव वाले सुन कर हंसने लगा और का भूत और हमारे गांव में गांव वालों ने कहा चलो तो देखें नदी में कौन सा भूत है नदी के पास पहुंचकर देखा कि वहां कोई भूत नहीं थी गांव वालों के आने के पहले भूत नदी के अंदर चली गई थी।


अगले दिन सुबह फिर गांव वाले नदी में कोई नहा रहा है तो कोई कपड़े धो रहा है तो कोई बर्तन साफ कर रहा है भूत नदी के अंदर से सब कुछ देख रही थी और भूत बोली गांव वाले ऐसे नहीं मानेंगे गांव वालों का कुछ ना कुछ तो करना ही पड़ेगा दोपहर के समय सुखिया नाम का एक व्यक्ति नहाने के लिए नदी में आता है जैसे ही नदी में जाता है तो भूत उसे अंदर खींचने लगता है सुखिया जोर जोर से चिल्लाने लगता है और भूत उसे नदी के अंदर खींच लेती है और नदी के बाहर फेंक देती है।

असली भूत की कहानी । भूत की कहानी मजेदार और प्रेरक


सुखिया बेहोश पड़ा होता है उसे बेहोश पड़ा। देख गांव वाले उसे उसके घर पर ले जाते हैं। गांव वाले उसे होश आने का इंतजार करते हैं।सुखिया जैसे ही होश में आता है तो गांव वाले उससे पूछने लगता है कि क्या हुआ सुखिया गांव वालों को बताता है कि जब मैं नहाने के लिए गया तो मुझे नदी के अंदर खींच रही थी सुखिया ने कहा कि यह शायद वहां भूत ही थी गांव वालों ने कहा तुम्हारा दिमाग तो ठीक है ना उसी वक्त सुरेश नाम का व्यक्ति बोला गांव वालों देख नहीं रहे हो भयंकर गर्मी के कारण सुखिया बेहोश हो गया होगा गांव वालों ने कहा ठीक बोल रहे हो यह कह कर गांव वाले चला गया।


फिर दूसरे दिन गांव की औरतें पानी लाने के लिए नदी जाती है। तभी नदी से डरावनी आवाज सुनाई पड़ती है और गांव की औरतें नदी से भाग जाती है भूत ने कहा गांव वाले ऐसे नहीं सुधरेंगे।


भूत रात होते ही ढेर सारा कचरा सुरेश के घर में फेंक देता है और वापस नदी में घुस जाती है। सुबह होते ही सुरेश की पत्नी देखती है कि ढेर सारा कचरा घर के बाहर पड़ा है वह अपने पति को बताती है और कचरा दिखाती है उसका पति कचरा को देखकर बहुत गुस्सा होता है जोर-जोर से चिल्लाने लगता है कि यह कचरा किसने फेंका तभी वहां गांव वाले पहुंच जाते हैं और बोला क्या हुआ सुरेश भाई, सुरेश बोला मेरे घर के बाहर कचरा किसने फेंका गांव वालों ने कहा तुम्हारे साथ किसी ने मजाक किया होगा सुरेश बोला अभी तो मैं चुप हूं लेकिन अगली बार नहीं छोडूंगा।


असली भूत की कहानी। भूतिया कहानी बहुत प्रेरणादायक हिंदी में 


फिर से भूत दूसरे दिन ढेर सारा कीचड़ मोहन के घर के बाहर फेंकने के लिए जाती है। उसी वक्त एक बूढ़ा बुजुर्ग पानी पीने के लिए उठता है। उनकी नजर खिड़की के बाहर पड़ता है और देखता है कि भूत ढेर सारा कीचड़ मोहन के घर के बाहर फेंक देता है और नदी में चली जाती है।



सुबह गांव वाले एक जगह इकट्ठा होकर विचार करते हैं कि रोज-रोज कूड़ा कचरा कौन फेंक कर चला जाता है। तभी वहां पर बूढ़ा बुजुर्ग पहुंच जाता हैं और कहते हैं तुम सब लड़ना बंद करो हमारे घर में कूड़ा कचरा कोई नहीं फेंका है तो फिर किसने फेंका जल्दी बताओ बूढ़ा बुजुर्ग बोला हां बताता हूं पहले तुम सब सरपंच के घर पर चलो सरपंच बोला तुम सब यहां क्या कर रहे हो बुरा बुजुर्ग ने कहा हमारे घर में कूड़ा कचरा भूत फेंककर चली जाती है सरपंच ने कहा भूत और वह हमारे गांव में मुझे तो कहीं नहीं दिखी।



बूढ़ा बुजुर्ग ने कहा, मैंने अपनी आंखों से देखा है। हमारे घरों में कूड़ा कचरा फेंकते हुए मैंने उनका पीछा किया और वह नदी के अंदर चली गई। सरपंच ने कहा, यह तो गंभीर समस्या है। हमें नदी में जाने का बहुत बड़ा खतरा हो सकता है। गांव के एक व्यक्ति ने कहा, नदी नहीं जाएंगे तो हमारा नहाना,कपड़े धोना, बर्तन धोना, खाना बनाना सारे काम नदी के पानी से ही होती है सरपंच ने कहा हमें एक तांत्रिक को बुलाना चाहिए वही कुछ कर सकता है एक तांत्रिक को बुलाता है और उसे सारी सच्चाई बताता है तांत्रिक ने कहा तो इसी के लिए हमें यहां बुलाया है तुम सब चिंता मत करो उस भूत को भगा दूंगा।


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नेहा के माता-पिता से तांत्रिक ने कहा, हमें गांव के बीचो-बीच हवन करना होगा। तांत्रिक हवन करने के लिए बैठ जाते हैं। गांव के सारे लोग वहां मौजूद होकर देख रहे हैं। तांत्रिक ने गांव के चारों तरफ भभूत छिड़क देते हैं और कहते हैं भूत गांव के अंदर नहीं आएगा सरपंच ने कहा पर नदी का क्या होगा वहीं से सारा काम होता है तभी वहां भूत हंसते हंसते चली आती है और कहती है कि तुम सब मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते इस तांत्रिक को तो मैं फूंक मारकर उड़ा सकती हूं सरपंच ने कहा तुम क्यों गांव वालों को परेशान कर रही हो गांव की औरतें पानी लाने जाती है तो उन्हें तुम डरा कर भगा देती हो या फिर घर-घर में कूड़ा कचरा फैला देती हो।


भूत ने कहा कूड़ा कचरा मैं करती हूं। जरा चलो तो तुम सब मेरे साथ नदी में भूत कहती है कि देखो तुम सब नदी का क्या हालत बना दिया है मैं तो नदी में आराम से रह रही थी पर तुम सभी गांव वालों ने नदी में इतना कूड़ा कचरा फैला दिया कि नदी के अंदर घुटन महसूस होने लगी जिसकी वजह से मैं नदी के बाहर आ गई और तुम सबको भगा दिया उसी वक्त सुखिया ने कहा तुमने नदी से भगा दिया अब कहां जाए पानी लाने के लिए भूत ने कहा तुम सब बहुत गंदे हो अपना घर तो साफ रखते हो पर घर का सारा कूड़ा कचरा नदी में फेंक देते हो उसी में नहाते हो,कपड़े धोते हो, खाना बनाते हो तुम सब इतना गंदा पानी कैसे पी सकते हो।

इसलिए मैंने सोचा तुमसब ऐसे नहीं मानोगे। तुम सब को सबक सिखाना जरूरी था। उसी वक्त गांव के एक व्यक्ति ने कहा, तुम ठीक बोल रही हो। अब हम सब नदी को गंदा नहीं करेंगे। भूत ने कहा अगर सरपंच जी गांव में कुआं बनवाएंगे तो किसी को भी नदी आने की जरूरत नहीं होगी घर का सारा काम घर में ही हो जाएगा यह कहकर भूत हमेशा के लिए चले जाती है।

2.असली भूत की कहानी। प्रेरक ऑटो वाले और भूतों की कहानी



सैकड़ों साल पहले कंकजोल नाम का गांव था उस गांव में रोहित और महिमा नाम का पति-पत्नी रहते थे उनके दो प्यारे-प्यारे बच्चे थे उनका नाम रोहन और सोहन था। रोहित ऑटो चलाए हुए पैसे से गुजर-बसर करता था। 1 दिन रोहित ऑटो चलाते हुए बहुत दूर निकल चुका था रात में आते समय एक सुंदर महिला दिखाई दी रोहित ने ऑटो रोका और कहा कहां जाना है मैडम भूत ने कहा भैया मेरा घर पास ही में है ले चलेंगे रोहित ने कहा बैठो बहन।



भूत ऑटो में चढ़ जाती है भूत के घर के पास रोहित ऑटो रोकता है और भूत पैसा देकर चली जाती है रोहित पैसा की गिनती करता है तो देखता है कि उस औरत ने पैसा ज्यादा दे दिया है रोहित जोर जोर से चिल्लाता है मैडम मैडम भूत पीछे मुड़कर नहीं देखती है रोहित की नजर उसकी पैर पर पड़ती है और देखता है कि उनका पैर पीछे की तरफ मुड़ा हुआ रोहित डर के मारे कांपने लगता है और जल्दी से ऑटो स्टैंड की तरफ चल देता है।

रोहित का दोस्त अभिनय रोहित को तेजी से ऑटो चलाते देख अभिनय से पूछता है इतनी तेजी से ऑटो क्यों चला रहे हो तो रोहित सारा सच बताता है अभिनय को विश्वास नहीं होता है उस भूत को देखने की बात कहते हैं फिर दोनों उस घर की तरफ चलता है।


असली भूत की कहानी।भूत कि कहानी सुरीली आवाज में 



दोनों दोस्त उस घर में घुस जाता है और जोर-जोर से कहता है कोई है उन दोनों को कोई आवाज नहीं सुनाई पड़े तो दोनों दो तरफ चला जाता है अचानक अभिनय और भूत सामने आ जाते हैं अभिनय जोर से कांपने लगता है और भूत-भूत चिल्लाते हुए घर के बाहर चला जाता है फिर भूत रोहित के सामने चला जाता है रोहित भूत को देखकर दंग रह जाता है भूत भूत चिल्लाते हुए घर के बाहर चले जाते हैं। अभिनय रोहित को बोलता है मैंने भूत को देखा रोहित ने कहा तो अब तुम्हें विश्वास हुआ।

असली भूत की कहानी। कहानी क्या कहना चाहता है


भूत दोनों की बातें चुपके चुपके सुन रहा होता है। भूत उन दोनों के सामने चला जाता है।भूत को देखते ही दोनों डर के मारे कांपने लगता है भूत कहती है तुम सब डरो मत तुम्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाऊंगी।


भूत ने उदास होकर कहा, मैं कुछ साल पहले इसी घर में मर गई थी। उन दोनों ने कहा, तुम उदास ना हो, तुम्हारी कोई अधूरी इच्छा है तो बताओ भूत ने कहा मैं गरीब लोगों की मदद करना चाहती हूं। भूत ने कहा क्या तुम लोग गरीबों को खाना पहुंचाने में मदद करोगे।

दोनों खुश होकर कहा क्यों नहीं बिल्कुल करेंगे, फिर वह अपनी जादुई शक्ति से ढेर सारा खाना उपलब्ध करती है रोहित और अभिनय गांव वालों को भोजन देकर आता है।

भूत खुशी होकर दोनों दोस्त को अपना जेवर उतारकर उन दोनों को दे देता है और दोनों खुशी-खुशी से अपना जीवन गुजारने लगता है।

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