[Heart Touching] माता-पिता पर सुविचार:Mata pita par suvichar ~ हिन्दी लव शायरी : Hindi Love Shayari

[Heart Touching] माता-पिता पर सुविचार:Mata pita par suvichar

कहानी एक माध्यम है किसी विचार और घटना को प्रदर्शित करने का कहानी के द्वारा बच्चों को अच्छे संस्कार और अच्छा इंसान बनाने का कहानी एकमात्र जरिया है।


Mata pita par suvichar






माता पिता पर सुविचार और माता-पिता लेख(moral story in hindi short)


माता-पिता आधार होता है हमारे जीवन का। हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका माता-पिता ही निभाते हैं। माता-पिता से ही अस्तित्व है।( माता पिता पर सुविचार) बिना माता-पिता का जीवन बिना छत के घर जैसा है


माता-पिता ही हमें अच्छे संस्कार और अच्छा अनुशासन देते हैं। अस्तित्व माता-पिता से ही होती है। माता-पिता नहीं तो कोई कहने वाला नहीं कि यह गलत है या सही हैं। माता पिता के बिना। जीवन कटी हुई पतंग की जैसा है जो की छूट जाने पर कहां पर रुकेगा, पता नहीं चलता है।


माता पिता पर सुविचार और बेटा पर लेख


बेटा, माता-पिता का एक अनमोल खजाना होता है जिसे कोई चुरा नहीं सकता है। माता पिता बेटे के साथ खेलता है। घूमता है। बेटे के मनोरंजन के साथ-साथ खुद माता पिता बेटे के साथ मनोरंजन का मजा लेता है। मैं जब बच्चा था तो माता-पिता मुझे रोज अपने कंधों पर बिठाकर बाहर घुमाने ले जाते थे।


माता पिता के लिए और दो शब्द(moral story in hindi short)


माता-पिता बच्चे का उंगली पकड़कर चलना सिखाता है।( माता पिता पर सुविचार) माता-पिता के आशीर्वाद के बिना कोई भी इंसान को ऊंचाई तक पहुंच पाना बहुत मुश्किल का काम होता हैै।


माता-पिता अपने बच्चों को उंगली पकड़कर स्कूल में पहुंचाता है और स्कूल जाने के क्या-क्या फायदे होते हैं, बताते हैं और वापस स्कूल से आते समय माता-पिता अपने बच्चों को उंगली पकड़कर लाते हैं। माता-पिता अपने बच्चों को घोड़ा बनकर अपने पीठ पर बिठाकर घुमाते हैं। माता-पिता बच्चों को अपने हाथों से भोजन खिलाते हैं, भूत वाली कहानियां  इत्यादि सुनाते हैं और अच्छे-अच्छे कपड़े पहनाते हैं।


माता-पिता को भगवान का दर्जा देना चाहिए क्योंकि माता-पिता हमें इस धरती पर लाकर अच्छे संस्कार, व्यवहार इत्यादि सिखाते हैं। माता-पिता का बात मानना और उनकी सेवा करना हमारा परम कर्तव्य है। माता पिता हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण आदर्श है।


जीवन में माता-पिता का होना अति आवश्यक है। बिना माता-पिता का जीवन बिना पानी के मछली जैसा है। जीवन में बच्चे के प्रति माता-पिता का बहुत बड़ा बलिदान होता है जिनका कल्पना सपनों में भी नहीं किया जा सकता। बिना माता-पिता की दुनिया कभी नहीं अपनाती हैं।

माता-पिता (माता पिता पर सुविचार) जिनके   पास होता है उनके पास दुनिया का अनमोल खजाना होता है। जिसे कोई चुरा नहीं सकता हैं। माता-पिता हमें पढ़ा लिखाकर एक गुणवान और कामयाब इंसान बनाते हैं। जब बच्चे को कामयाबी हासिल होती है तो माता-पिता के चेहरा खुशी से फूल उठता है।


माता-पिता अपने बच्चों से क्या चाहते है (moral story in hindi short)


माता-पिता अपने बच्चों से हमेशा यही चाहते हैं कि हमारे बच्चे को किसी प्रकार का दुख, कष्ट का सामना ना करना पड़े। हमारा बच्चा किसी गलत राह पर ना चला जाए और उन्हें हमेशा जिम्मेदारियों को समझाते हैं कि यह जिम्मेदारी इस तरह से निभाते हैं।


आइए एक उदाहरण से समझते हैं


महेशघाटी नामक एक छोटा सा गांव था। उस गांव में एक गरीब किसान रहता था। उसका नाम भारत राय था। उसका एक प्यारा सा बेटा था। उसका नाम दीपक कुमार था। उनके माता का नाम मंसूरी देवी थी। दीपक कुमार के माता-पिता साथ में खेत में काम करने जाते थे कभी-कभी दीपक को भी अपने कंधों पर बिठाकर खेत ले जाते थे और उसे पेड़ की छांव में बिठाकर उसे बहुत सारा खेलौना, खाने की चीज इत्यादि उसके पास रख देते थे। दीपक खेलता रहता था और फिर वापस घर आने के समय दीपक को उसके पिताजी अपने कंधों पर बिठाकर वापस घर लाते थे।


4 साल बीतने के बाद (moral story in hindi short)


4 साल बाद उसके माता-पिता सोच रहे थे कि हम तो पढ़े लिखे नहीं है लेकिन अपने बेटे को पढ़ा लिखा कर एक कामयाब इंसान बनाऊंगा। उनके माता ने कहा, आपका विचार तो अच्छा है (माता पिता पर सुविचार) जी लेकिन पढ़ाने लिखाने के लिए बहुत सारा पैसा की जरूरत होती है। फिर उनके पिताजी ने कहा तुम चिंता मत करो पैसे का इंतजाम हो जाएगा।माताजी ने कहा पर कैसे जी हमारी तो इतनी आमदनी भी नहीं है। यह सुनकर उनके पिताजी सोच में पड़ गए।


कुछ दिनों के बाद


कुछ दिन बाद दीपक के माता जी उनके पिता से कहते हैं कि हमारे पड़ोस में एक साहूकार है। उन्हें काम करने वाले की जरूरत है। क्यों ना उस साहूकार से बात करके देखें पति ने कहा तो ठीक है लेकिन हमारी खेती कैसे होगी पत्नी ने कहा देखिए आधा दिन खेती करने जाएंगे और आधा दिन साहूकार के घर में काम करने जाएंगे पति ने कहा ठीक है।


दूसरे दिन उनके माता-पिता साहूकार के घर निकल गया और वहां जाकर बोला, सेठ जी हमें काम की जरूरत है। क्या आप हमें काम दे सकते हैं। साहूकार ने कहा, ठीक है हमें जरूरत है।


बेटा के 6 साल होने के बाद (moral story in hindi short)


जब बेटे का उम्र 6 साल का हो गया तो उनके माता-पिता ने उन्हें एक अच्छे से प्राइवेट स्कूल में भर्ती कर दिया। इधर बेटे की पढ़ाई जोर से चलने लगा। उधर माता-पिता खेतों के साथ-साथ साहूकार के घर में काम करने जाते थे।


पढ़ाई के दौरान उनके पिता उन्हें अपने कंधों पर बिठाकर स्कूल ले जाते थे और वापस आने के वक्त भी कंधों पर बिठाकर स्कूल से लाते थे। रविवार की छुट्टी के दिनों में उनका पूरा परिवार माता-पिता और दीपक घूमने के लिए बाहर जाया करते थे और खूब मजे करते थे जैसे जैसे समय बीतता गया वैसे वैसे बेटे की पढ़ाई पूरी होती गई कुछ साल बाद दीपक को आगे की पढ़ाई के लिए सरकार की तरफ से दिल्ली में निशुल्क पढ़ाई करने का मौका मिला यह बात सुनकर उनके माता-पिता को खुशी का ठिकाना नहीं रहा।


दीपक कुमार की सपनों की उड़ान

माता-पिता(माता पिता पर सुविचार) उसे आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली भेज दिया। वहां जाकर कुछ दिन आराम किया। फिर उसके बाद कॉलेज गया जैसे ही कॉलेज पहुंचा। कॉलेज के विद्यार्थियों ने उनके कपड़े और उनके चाल चलन को देखकर खूब मजाक उड़ाने लगा, क्योंकि गांव का रहन सहन अलग था और शहर का रहन-सहन अलग था।विद्यार्थियों ने कहा है यही वह छात्र है जो कि सरकार ने उन्हें गांव से बुलाकर दिल्ली जैसे शहर में पढ़ने का मौका दिया कुछ दिनों के बाद दीपक का पढ़ने का तरीका,बोलने का तरीका इत्यादि कॉलेज के विद्यार्थियों को काफी प्रभावित करने लगा धीरे-धीरे कॉलेज के छात्र ने उनके साथ दोस्ती करने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया दीपक ने उनकी दोस्ती को स्वीकार किया और कहीं भी समझ ना आने पर दीपक से समझाकर लेते थे।


कॉलेज की पढ़ाई पूरा होने के बाद दीपक ने IAS की तैयारी करना शुरू कर दिया क्या रात, क्या दिन कुछ भी नहीं सोचते थे मेहनत और लगन से पढ़ाई करते जाते थे उसे पढ़ाई का इतना दीवानापन था कि कब खाया पिया पता नहीं चलता था। दीपक ने IAS की परीक्षा देने के बाद वापस घर लौट गया और माता-पिता की खूब सेवा की और उन्हीं के साथ खेतों में काम करने के लिए जाते थे।


कुछ दिनों के बाद IAS परीक्षा का परिणाम निकला उसमें दीपक कुमार का भी चुनाव हुआ यह बात सुनकर माता-पिता के आंखों से आंसू निकल आया। दीपक कुमार को IAS के इंटरव्यू के लिए दिल्ली बुलाया गया और दीपक कुमार का इंटरव्यू सफल हुआ। दीपक कुमार समाज का एक सही रास्ता दिखाने वाला एक मार्गदर्शक बन चुका था।

दोस्तों इस कहानी से हमें यह पता चला कि लक्ष्य चाहे जो भी हो उसे पूरा करने के लिए हमें अपना जुनून, दीवानापन, पागलपन उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगा देना चाहिए जैसे की हमलोगों ने अभी पढ़ा कि किस तरह उसके पिताजी( माता पिता पर सुविचार) खेती करने में सफल रहें। और उनका बेटा पढ़ाई करके IAS बनने में सफल रहा।

मैं आशा करता हूं कि आप सभी को इस कहानी से बहुत कुछ जानकारी मिला होगा। ऐसे ही आधुनिक कहानी पढ़ने के लिए जुड़े रहिए हमारे साथ।

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